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दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर और जेएनयू की पूर्व छात्रा कमलेश ने अपने फेसबुक पेज पर जून 2015 की घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि कन्हैया कुमार ने जेएनयू हॉस्टल परिसर में किस तरह उनसे अभद्रता की थी।

उन्होंने कन्हैया की महिला विरोधी सोच पर प्रहार करते हुए कहा है कि महिला दिवस पर महिला अधिकारों की बड़ी-बड़ी बाते करने वाला कन्हैया एक फर्जी क्रांतिकारी है।

कमलेश ने लिखा है, जेएनयू की घटना को जिस तरह नित नए मोड़ दिए जा रहे हैं, मैं उससे आहत हूं। कमलेश के उस शिकायती पत्र का ब्योरा कुछ इस तरह से है जिसके आधार पर कन्हैया पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगा था।

’10 जून 2015 की सुबह मैंने जेएनयू की एक मुख्य सड़क पर कन्हैया कुमार को पेशाब करते देखा। मना करने पर वह आक्रामक और धमकाने वाले अंदाज में बहुत करीब आकर मुझ पर चिल्लाने लगा। उसने मुझे सनकी और पागल तो कहा ही, पागल खाने में इलाज कराने को भी बोला। उसने कहा, मै यहां जो चाहूं कर सकता हूं। तुम मुझे रोक नहीं सकतीं। मेरी जहां मर्जी वहां पेशाब करुंगा। मैं तुम्हें देख लूंगा।’ कमलेश ने यह भी लिखा है कि मां की एक महीने की तनख्वाह के बराबर जुर्माना भरा है जेएनयू के इस क्रांतिकारी ने।

उन्होंंने यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार की कार्रवाई का समर्थन नहीं कर रही हैं, लेकिन सरकार की आलोचना करने और कन्हैया को क्रांतिकारी के तौर पर पेश करने में अंतर है। उन्होंने कन्हैया को पाखंडी और अवसरवादी बताते हुए जेएनयू छात्रों को ताकीद की है कि उन्हें इस पर सोचना चाहिए कि वे किस तरह का संदेश दे रहे हैं।

Source: Today Hindi News

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