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रंगदारी और सुपारी के लिए बदनाम उत्तर प्रदेश की जेलें एक बार फिर सियासी अखाड़ा बन गयी हैं। कई ‘माननीयों’ के जेल में होने की वजह से सलाखों के पीछे से गोटियां बिछाई जाने लगी हैं।

यह अलग बात है कि इन जेलों में जरायम का चटख रंग चढ़ा है क्योंकि इनके लिए बाहुबलियों की ही गोलबंदी साफ दिख रही है। हाल में एमएलसी चुनाव जीते बाहुबली बृजेश सिंह सहारनपुर, वाराणसी के पिंडरा विधायक अजय राय फतेहगढ़ सेंट्रल जेल और मऊ के विधायक मुख्तार अंसारी आगरा सेंट्रल जेल से सियासी समीकरण फिट करने में लगे हैं जबकि झांसी जेल में रहते हुए माफिया डान मुन्ना बजरंगी ने फिर सियासी पारी खेलने की मुहिम शुरू की है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश की गिरोहबंदी में अजय राय और बृजेश सिंह एक खेमे के माने जाते हैं जबकि मुख्तार और मुन्ना का दूसरा खेमा है। हालांकि बदलते वक्त ने इनके बीच दूरियां भी बढ़ाई हैं और सब अपना-अपना सिक्का चलाने की जुगत कर रहे हैं। पूर्वाचल के बाहुबलियों की पश्चिम की जेलों में मौजूदगी से उनके समर्थकों और शूटरों के बीच टकराव की भी आशंका काफी बढ़ी है।

सहारनपुर जेल में रहकर चुनाव जीतने को बृजेश शुभ मान रहे हैं। अब वह पत्नी अन्नपूर्णा सिंह को चंदौली की सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। सैयदराजा से बृजेश कम मतों से 2012 का चुनाव हारे थे। एक सांसद व विधायक समेत कई जनप्रतिनिधि और दबंग उनसे सहारनपुर जाकर मिल चुके हैं।

वाराणसी के एक धार्मिक बवाल के चलते फतेहगढ़ जेल में बंद अजय राय से कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मधुसूदन मिस्त्री और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री फतेहगढ़ जेल में मिल आये हैं। चूंकि राय काफी समय से जेल में बंद हैं और चुनावी तैयारी शुरू है इसलिए वह भी अपने समर्थकों से संपर्क कर समीकरण बनाने में सक्रिय हैं। उधर आगरा जेल में बंद मुख्तार अंसारी 2017 के विधानसभा चुनाव पर केंद्रित हो गए हैं। बाहुबली अंसारी एक राजनीतिक दल से समझौते की जुगत में हैं लेकिन बात न बनने पर कौमी एकता दल से ही दांव आजमाएंगे। मुख्तार के पुत्र के भी चुनाव लडऩे की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। 2012 में जौनपुर जिले की मडिय़ांहू सीट से अपना दल के टिकट पर तीसरे स्थान पर रहे प्रेम सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी ने फिर चुनावी तैयारी शुरू की है।

Source: यूपी में जेलों से बिछाई जा रहीं सियासी गोटियां

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