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उत्तराखंड में चल रही राजनैतिक उठापठक पर शिवसेना ने सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि “देवभूमि में क्या हुआ! लोकतंत्र की मौत या हत्या?”। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए लिखा है कि “उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। उस देवभूमि में लोकनियुक्त सरकार के अकस्मात ‘निधन’ की खबर आ रही है। यह मौत नही बल्कि हत्या है ऐसा आरोप कांग्रेस सहित विरोधियों ने लगाया है।”

सामना में लिखे गए लेख केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाते हुए लिखा गया है कि अगर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को बहुमत सिद्ध करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया था तो एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन क्या हासिल हुआ?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को कठघरे में खड़ा करते हुए सामना ने लिखा है कि एक मुख्यमंत्री खुद ही विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं जैसा कि स्टिंग के वीडियो में दिख रहा है, तो ऐसे में मुख्यमंत्री की नैतिकता पर सवाल खडे होना स्वाभाविक है। सामना ने लिखा है कि जिस तरह हिमाचल के मुख्यमंत्री के खिलाफ आमदनी से अधिक संपति की जांच चल रही है, उससे जो उत्तराखंड में हुआ उसकी पुनरावृत्ति अगर हिमाचल में हो जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा गठबंधन पर सामना ने कहा कि महाराष्ट्र में वर्तमान शासन व्यवस्था एक मजबूरी के तहत निर्मित हुई है। और यहां अस्थिरता और राजनैतिक अराजकता ना हो इसलिए शिवसेना सरकार के साथ है। इस लेख के अंत में कहा गया है कि एकदलीय शासन की आस, आपातकाल और तानाशाही से भी भंयकर होता है।

Source: सामना के जरिए शिवसेना ने कहा, देवभूमि में लोकतंत्र की मौत या हत्या?

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