Tags

, , , ,

 स्मोलेंस्क हवाई हादसे की पोलैंड 6वीं बरसी मना रहा है। लेकिन आज छ साल बाद भी उस हादसे को लेकर कई कहानियां सामने आ रही हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए ऐसी कहानियों को बुना जा रहा है जिससे लोगों के मन में एक तरह की उत्सुकता बनी रहे।

अप्रैल 2010 में वारसा से पश्चिम रसिया की उड़ान पर पोलैंड का विमान TU-154M स्मोलेंस्क की सीमा में हादसे का शिकार हो गया था। विमान में पोलैंड के राष्ट्रपति लेक कांस्की और उनके शीर्ष अधिकारियों समेत 96 लोग सवार थे। हादसे के बाद गठित रसियन-पोलिश टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विमान का पायलट लगातार दबाव में था। और उसके पास अनुभव की कमी थी।

अंग्रेजी न्यूज एजेंसी आरटी के मुताबिक स्मोलेंस्क एटीसी की अनदेखी कर विमान को रनवे पर उतारने की कोशिश की लेकिन धूंध और विजिबिलिटी की कमी से विमान दुर्घटना का शिकार हो गया।

इलेक्ट्रानिक डिवाइस में रिकॉर्ड आवाज से ये साफ होता है कि एटीसी ने पायलट को कहा कि विमान को ऊपर ले जाओ लेकिन विमान जमीन से टकरा गया और विमान कई टुकड़ों में बंट गया। लेकिन पोलैंड में ये खबरें सामने आने लगी कि रसिया ने एक सुनियोजित योजना के तहत विमान हादसा कराया ताकि पोलैंड में तख्तापलट कराया जा सके।

पोलिश सरकार ने भी ये माना था कि रनवे के करीब एक बड़े बर्च पेड़ से विमान टकराया और कई हिस्सों में विमान टूट गया। लेकिन 2013 में कुछ शोधकर्ता एक नए विचार के साथ सामने आए । उन्होंने कहा कि बर्च का पेड़ हादसे से करीब पांच दिन पहले ही टूट कर गिरा हुआ था। किसी शख्स ने पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की थी और पेड़ को काटकर गिरा दिया था।

इससे पहले साल 2011 में इस तरह के तथ्य सामने आए कि हादसे के दिन रनवे और स्मोलेंस्क के स्पेस में धूंध नहीं थी बल्कि कृत्रिम तरीके से धूंध का निर्माण किया गया।

स्मोलेंस्क हादसे से जुड़े दावों का सच क्या है इसके लिए अभी भी जांच चल रही है। लेकिन पोलैंड में ये मुद्दा न केवल पोलिश लोगों की भावना से जुड़ा हुआ है बल्कि इस मुद्दे पर जमकर राजनीति भी होती है। Read more http://www.jagran.com

Advertisements