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अखिर वही हुआ जिसका डर था। अधिकारियों की लापरवाही से मंगलवार रात सैनिक अस्पताल से भागा तेंदुआ बुधवार सुबह रिहायसी इलाके में पहुंच ही गया। सुबह के समय आर्मी के निर्माणाधीन क्वार्टरों में घुस गया और वहां काम करने वाले मजदूरों पर हमला बोल दिया और पांच लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। तेंदुआ भागने के बाद चैन की नींद सोई पुलिस, प्रशासन व वन विभाग की टीम की नींद तेंदुए द्वारा कई लोगों को घायल करने के बाद टूटी और तमाम अधिकारी आंख मलते हुए मौके पर पहुंचे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक बार फिर तेंदुआ आर्मी की 60 इंजीनियर यूनिट के जेसीओ मेस में घुस गया है। उसे पकडऩे के प्रयास शुरू कर दिये गए हैं। तेंदुआ मेस के बालकनी में ही है और सामने यूनिट के आवास हैं, लिहाजा वन विभाग मौके के इंतजार में है। ताकि पूरी घेराबंदी कर उसे पकड़ा जा सके।

गौरतलब है कि मंगलवार सुबह सात बजे सैनिक अस्पताल के सी ब्लाक मे तेंदुआ घुस गया था। बाद में वह परिसर में ही एक पेड़ पर चढ़ गया था। रात करीब दो बजे ट्रैंकुलाइजिंग के दौरान लचर व्यवस्थाओं का फायदा उठाते हुए तेंदुआ पेड़ से छलांग लगाकर रेस कोर्स की ओर भाग निकला था। उस वक्त अधिकारियों ने कोई सर्च अभियान नहीं चलाया और अपने-अपने घरों को चलते बने। उसी का परिणाम रहा कि बुधवार सुबह रेस कोर्स के कुछ दूरी पर ही निर्माणाधीन आर्मी के क्वार्टर तक पहुंच गया।

बताया जाता है कि ड्यूटी पर तैनात जवान हेमचंद ने इस तेंदुए को देखा और हलवदार जितेंद्र को सूचना दी। रात में ही इसका अंदेशा जता दिया गया था कि तेंदुआ रिहायसी इलाके में जा सकता है लेकिन तब तमाम प्रशासनिक अधिकारियों व डीएफओ ने यह कहते हुए पल्ला झाडऩे की कोशिश की थी कि तेंदुआ अब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और जंगल की ओर निकल जाएगा। अधिकारियों के इन दावों की उस वक्त हवा निकल गई जब रेस कोर्स के कुछ आगे रेलवे लाइन के पार फाजलपुर क्षेत्र में सेना के जवानों ने निर्माणाधीन क्वार्टर में तेंदुआ को घुसा देखा। यहां काम करने के लिए सुबह आठ बजे मजदूर आते हैं। तेंदुए ने टावर नंबर पांच में मजदूर महेश, बबलू, संदीप समेत पांच लोगों को जख्मी करते हुए भाग निकला। यहां से निकलकर तेंदुआ 60 इंजीनियर्स यूनिट में पहुंच गया और जेसीओ मेस में घुस गया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ मेस के बरामदे में मौजूद है और टीम घेराबंदी कर रही है।

दिल्ली से टीम आई, लेकिन उसके पास भी न्यूमेटिक गन नहीं थी। काफी देर बाद दुधवा नेशनल पार्क से टीम बुलाई गई। रात 11 बजे पहुंची टीम ने रात 12:45 पर उसे ट्रैंकुलाइज किया गया, लेकिन तीसरा शॉट मारते ही तेंदुआ बरगद के पेड़ से कूद रेसकोर्स की ओर भाग निकला और पूरे अमले के मुंह पर खिसियाहट छोड़ गया। यह हालात तब है जब करीब दो साल पहले तेंदुआ मेरठ के कैंटोंनमेंट अस्पताल में घुस आया था और पूरा शहर तीन दिन दिन दहशत में रहा था। उस वक्त भी अधिकारियों की लापरवाही से तेुदुआ तमाम व्यवस्थाओं को ध्वस्त करते हुए भाग निकला था। लेकिन वन विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन और सेना तक में से कोई नहीं चेता।

Source: मेरठ के सैनिक अस्पताल से भाग तेंदुआ सैन्य यूनिट में घुसा, पांच घायल

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