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आखिरकार 51 घंटे बाद मैराथन प्रयास और अफरा तफरी के बाद वन विभाग और बाहर से आईं एक्सपर्ट टीमों ने तेदुए को ट्रैंकुलाइज कर काबू में कर लिया। बेहोशी की हालत में तेंदुए को पिंजरे में बंद कर दिया गया है। कानपुर व दूधवा से आई टीमों ने आज सुबह साढ़े सात बजे आपरेशन शुरू किया था और लगभग पौने ग्यारह बजे सफलता मिली। इस दौरान कानपुर से आई टीम में शामिल एक डाक्टर तेंदुआ का पंजा लगने से जख्मी हो गया।

गौरतलब है कि मंगलवार सुबह तेंदुआ सैनिक अस्पताल में घुस गया गया था। काफी प्रयास के बाद भी वह काबू में नहीं आया था और ट्रैकुलाइज के दो तीन शॉट लगने के बाद भी रात दो बजे तेंदुआ पेड़ से कूदकर रेस कोर्स की ओर भाग निकला था। बुधवार को पांच लोगों को घायल करते हुए तेंदुआ 60 इंजीनियर्स यूनिट के जेसीओ मेस में घुस गया था। कल रात भर प्रयास के बाद भी उसे काबू में नहीं किया जा सका था। गुरुवार सुबह कानपुर से आई टीम ने दुधवा की टीम के साथ संयुक्त आप्रेशन चला तेंदुए को बेहोश कर पकड़ लिया और पिंजड़े में डाल दिया। इसके बाद वन विभाग की टीम उसे जाल में डालकर ले गई।

इससे पहले अधिकारियों की लापरवाही से मंगलवार रात सैनिक अस्पताल से भागा तेंदुआ बुधवार सुबह रिहायसी इलाके में पहुंच ही गया था।

तेंदुए ने सुबह के समय आर्मी के निर्माणाधीन क्वार्टरों में घुस गया और वहां काम करने वाले मजदूरों पर हमला बोल दिया और पांच लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। तेंदुआ भागने के बाद चैन की नींद सोई पुलिस, प्रशासन व वन विभाग की टीम की नींद तेंदुए द्वारा कई लोगों को घायल करने के बाद टूटी और तमाम अधिकारी आंख मलते हुए मौके पर पहुंचे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक बार फिर तेंदुआ आर्मी की 60 इंजीनियर यूनिट के जेसीओ मेस में घुस गया है। उसे पकडऩे के प्रयास शुरू कर दिये गए हैं। तेंदुआ मेस के बालकनी में ही है और सामने यूनिट के आवास हैं, लिहाजा वन विभाग मौके के इंतजार में है। ताकि पूरी घेराबंदी कर उसे पकड़ा जा सके।

गौरतलब है कि मंगलवार सुबह सात बजे सैनिक अस्पताल के सी ब्लाक मे तेंदुआ घुस गया था। बाद में वह परिसर में ही एक पेड़ पर चढ़ गया था। रात करीब दो बजे ट्रैंकुलाइजिंग के दौरान लचर व्यवस्थाओं का फायदा उठाते हुए तेंदुआ पेड़ से छलांग लगाकर रेस कोर्स की ओर भाग निकला था। उस वक्त अधिकारियों ने कोई सर्च अभियान नहीं चलाया और अपने-अपने घरों को चलते बने। उसी का परिणाम रहा कि बुधवार सुबह रेस कोर्स के कुछ दूरी पर ही निर्माणाधीन आर्मी के क्वार्टर तक पहुंच गया।

बताया जाता है कि ड्यूटी पर तैनात जवान हेमचंद ने इस तेंदुए को देखा और हलवदार जितेंद्र को सूचना दी। रात में ही इसका अंदेशा जता दिया गया था कि तेंदुआ रिहायसी इलाके में जा सकता है लेकिन तब तमाम प्रशासनिक अधिकारियों व डीएफओ ने यह कहते हुए पल्ला झाडऩे की कोशिश की थी कि तेंदुआ अब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और जंगल की ओर निकल जाएगा। अधिकारियों के इन दावों की उस वक्त हवा निकल गई जब रेस कोर्स के कुछ आगे रेलवे लाइन के पार फाजलपुर क्षेत्र में सेना के जवानों ने निर्माणाधीन क्वार्टर में तेंदुआ को घुसा देखा। यहां काम करने के लिए सुबह आठ बजे मजदूर आते हैं। तेंदुए ने टावर नंबर पांच में मजदूर महेश, बबलू, संदीप समेत पांच लोगों को जख्मी करते हुए भाग निकला। यहां से निकलकर तेंदुआ 60 इंजीनियर्स यूनिट में पहुंच गया और जेसीओ मेस में घुस गया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ मेस के बरामदे में मौजूद है और टीम घेराबंदी कर रही है।

बुढ़ानपुरा में तीसरे दिन भी दिखा तेंदुआ

दिल्ली से टीम आई, लेकिन उसके पास भी न्यूमेटिक गन नहीं थी। काफी देर बाद दुधवा नेशनल पार्क से टीम बुलाई गई। रात 11 बजे पहुंची टीम ने रात 12:45 पर उसे ट्रैंकुलाइज किया गया, लेकिन तीसरा शॉट मारते ही तेंदुआ बरगद के पेड़ से कूद रेसकोर्स की ओर भाग निकला और पूरे अमले के मुंह पर खिसियाहट छोड़ गया। यह हालात तब है जब करीब दो साल पहले तेंदुआ मेरठ के कैंटोंनमेंट अस्पताल में घुस आया था और पूरा शहर तीन दिन दिन दहशत में रहा था। उस वक्त भी अधिकारियों की लापरवाही से तेुदुआ तमाम व्यवस्थाओं को ध्वस्त करते हुए भाग निकला था। लेकिन वन विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन और सेना तक में से कोई नहीं चेता।

तीसरा ट्रैंकुलाइजर लगते ही भाग निकला

सुबह साढ़े सात बजे तेंदुए के दिखने के बाद दिन भर वन विभाग से लेकर प्रशासन तक सिवा तमाशा देखने के अलावा कुछ न कर सका। दिल्ली से आई टीम ने जब मेरठ की गन से ट्रैंकुलाइज करने से इन्कार कर दिया तो दुधवा नेशनल पार्क से टीम बुलाई गई। रात ग्यारह बजे दुधवा नेशनल पार्क के विशेषज्ञों की टीम आई। उसने रात 12:45 पर पहली बार पेड़ पर बैठे तेंदुए को ट्रैंकुलाइज किया। इसके बाद एक बजे हवाई फायर कर जांचा भी गया कि तेंदुआ बेहोश हुआ कि नहीं। सीढ़ी और जाल भी मंगा लिया गया। तेंदुए की गर्दन झूलने पर दूसरा ट्रैंकुलाइजर शॉट 1:12 पर और तीसरा 1:16 मिनट पर मारा गया, लेकिन तीसरा शॉट लगते ही पेड़ से कूदकर आर्मी अस्पताल की दीवार फांद कर रेसकोर्स की ओर भाग निकला।

तेंदुए को सुबह साढ़े सात बजे सबसे पहले एमएच के स्टेशन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (एसएचओ) कार्यालय में देखा गया। हेल्थ इंस्पेक्टर विष्णु स्वरूप तिवारी कार्यालय खोलने पहुंचे तो कोने में बैठा तेंदुआ गुर्रा कर उन पर झपटा। वे नीचे बैठ गए और तेंदुआ ऊपर से निकल गया। उन्होंने शोर मचाया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अनिल ने भी बच्चा वार्ड के गलियारे में तेंदुए को देखकर शोर मचा दिया। आननफानन में वार्ड को बंद कर दिया गया। शोर से घबराया तेंदुआ वार्डों में घुसने की कोशिश करता रहा। इसके बाद महिला वार्ड व ऑफिसर फैमिली वार्ड की ओर बढ़ा। अस्पताल में करीब 20 मिनट तक तेंदुआ चक्कर काटता रहा। कुछ देर ओझल रहने के बाद वह बरगद के पेड़ पर बैठा दिखा। सेना ने स्थानीय पुलिस-प्रशासन और वन विभाग को सूचित किया। कैंट के वेस्ट एंड रोड स्थित सभी स्कूलों को सूचना देकर बच्चों को कमरों के अंदर रहने को कहा गया। सेना,पुलिस से लेकर वन विभाग की टीम सूचना के बाद बारी-बारी से पहुंचती रही, लेकिन शाम छह बजे तक तेंदुए को पकडऩे की कोई कोशिश भी नहीं शुरू हो सकी। एक बार ब्लो गन से निशाना लगाया गया, लेकिन निशाना चूक गया।

वार्डों में नहीं घुस पाने पर तेंदुआ ऑफिसर फैमिली वार्ड के पीछे से फांदकर बाहर चला गया। इस दौरान उसे चोट भी लगी। खून से सने पंजे के निशान सैनिक अस्पताल में देखे गए। कुछ देर तेंदुआ नहीं दिखा। करीब सवा 11 बजे एमएच के ओपीडी में मौजूद फाजलपुर के आसिफ अली ने अस्पताल की बाहरी दीवार पर फिर तेंदुए को देखा। इसके बाद तेंदुआ ओपीडी वार्ड के पीछे स्थित बरगद के पेड़ पर बैठ गया।

तेंदुए की सूचना मिलते ही वेस्ट एंड रोड स्थित सभी स्कूलों को सतर्क कर दिया गया। स्कूलों में बच्चों को कमरों में बंद कर बाहर नहीं जाने दिया गया। प्राथमिक जांच के बाद वन विभाग की ओर से तेंदुए के एमएच से चले जाने की पुष्टि करने पर स्कूलों ने छुट्टी के समय ही बच्चों को बाहर निकाला। हालांकि बाद में तेंदुआ फिर एमएच में दिखा। वन विभाग ने बच्चों से जुड़े मसले पर भी लापरवाही दिखाई और जल्दबाजी में उसके अस्पताल से तेंदुए के जाने की घोषणा की। Read more http://www.jagran.com/

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