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कर्नाटक समेत पूरा दक्षिण और पश्चिमी भारत इन दिनों भीषण गर्मी और गंभीर जलसंकट से जूझ रहा है। कुछ जगहों पर पानी की इतना बड़ा संकट हो गया है कि लोग अपना घरबार छोड़ कर पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं।

बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही जनता और अपने चुने हुए नेता से आस लगाए हुए है कि शायद वो इस संकट की घड़ी में उनकी मदद करेंगी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से नेताओं द्वारा इस संकट की घड़ी में भी जनता की भावनाओं की बजाय अपनी सुविधाओं को तरजीह देने की घटनाएं अपने आप में काफी चौकाने वाली हैं।

सीएम के काफिले के लिए टैंकर से रोड पर पानी का छिड़काव

इसी तरह की एक घटना सोमवार को कर्नाटक के बागालकोट इलाके में देखने को मिली जो कि सूखे से जूझ रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को यहां का दौरा करना था लेकिन उनके दौरे से पहले सड़कों पर टैंकरों के जरिए पानी बहाया गया। संभवतया इसलिए ताकि जिस रोड़ से सीएम साहब की गाड़ी जाए वहां रोड़ पर थोड़ी ठंडक बनी रहे और धूल न उड़े।ये पहला मामला नहीं है जब मंत्रियों के दौरे के लिए पानी की बर्बादी की गई हो। इससे पहले महाराष्ट्र में भी हाल ही में दो ऐसे मामले सामने आए जहां सूखे को लेकर मंत्रियों की उदासीनता देखने को मिली। आइए आपको बताते हैं क्या थे ये मामले।

सूखे में मंत्री की सेल्फी
इससे पहले महाराष्ट्र के लातूर में सूखाग्रस्त इलाके का दौरा करने गई महाराष्ट्र की राजस्व मंत्री पंकजा मुड़े सेल्फी खींचती हुई पाई गईं। पंकजा मुड़ें की इन तस्वरों ने विपक्ष को भी उनपर जमकर निशाना साधने का भरपूर मौका दिया।

मंत्री के हैलिपैड के लिए 10 हजार लीटर पानी बर्बाद

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने भी लातूर में सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा करने की योजना बनाई। इस दौरान प्रशासन ने मंत्री जी के हैलिकॉप्टर के लिए हैलिपैड बनाने और हैलिकॉप्टर से उड़ने वाली मिट्टी को दबाने के लिए एक ही दिन में दस हजार लीटर पानी बहा दिया।

आपको बता दें कि पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि देश में कुल 256 ऐसे जिले हैं जो इस समय सूखे की चपेट में हैं और करीब 25 फीसदी आबादी इस समय पानी की समस्या का सामना कर रही है। Read more http://www.jagran.com/

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