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कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की अर्जी पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने बागी विधायकों को झटका देते हुए शक्ति परीक्षण के दौरान वोट देने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड हाइकोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए अपना निर्णय सुनाया। हाइकोर्ट के फैसले के बाद बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी। चीफ जस्टिस ने इन विधायकों से जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच में जाने को कहा था। इसके अलावा इस मामले में उत्तराखंड स्पीकर ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की है। इस याचिका में बागी विधायकों के मामले में कोई भी आदेश से पहले उनका पक्ष भी सुनने की अपील की गई है।

उत्तराखंड कांग्रेस की नेता इंदिरा हृदयेश ने कहा कि ये फैसला हमारे लिए बड़ी राहत लेकर आया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुमत है और हम हासिल करके रहेंगे।

अर्जी खारिज होने का मतलब

कांग्रेस के 9 विधायकों की अर्जी खारिज होने का मतलब फिलहाल ये है कि कांग्रेस के बागी विधायक मंगलवार को शक्ति परीक्षण में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

पर्यवेक्षक के संबंध में संशोधन की मांग

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट फ्लोर टेस्ट के आदेश में ऑब्जर्वर के लिए संशोधन की मांग की है। केंद्र की ओर से AG ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट कराने के लिए विधानसभा के प्रमुख सचिव को ऑब्जर्वर बनाया है जबकि वहां ऐसी कोई पोस्ट नहीं है। ये पोस्ट सचिव, विधानसभा एवं संसदीय मामले होना चाहिए। फ्लोर टेस्ट जिला जज की निगरानी में हो सकता है। लेकिन कांग्रेस ने कहा कि जिला जज कैसे ऑब्जर्वर बन सकते हैं।

सीबीआई के समक्ष आज पेश नहीं हुए हरीश रावत

उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आज सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए। सीबीआई ने हरीश रावत को कथित स्टिंग मामले में समन जारी किया था। उत्तराखंड में नौ कांग्रेस विधायकों की बगावत के बाद हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था। इस कथित स्टिंग में रावत विधायकों की खरीद-फरोख्त के संबंध में चर्चा करते हुई दिखाई दे रहे थे। हरीश रावत ने कहा कि यकीन है कि सीबीआई ने उनकी कठिनाई को समझते हुए पेश होने के लिए कुछ समय देगी। इस मामले में वो सीबीआई को पूरी जानकारी देंगे । उन्होंने कहा कि अगर कैलाश विजयवर्गीयजी अमित शाह जी और श्याम जाजू अपने नार्को टेस्ट के लिए तैयार है तो मैं भी अपने नार्को टेस्ट के लिए तैयार हूं ।

बागी विधायक और सुप्रीम कोर्ट

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट पर फैसलेे के दौरान बागी विधायकों के संबंध में कहा था कि सही है या गलत आप लोग 10 मई को होने वाले शक्ति परीक्षण में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। अदालत ने बागी विधायकों से कहा कि आप लोग इस संबंध में उत्तराखंड हाइकोर्ट में अपील कर सकते हैं।

हरीश रावत सरकार के खिलाफ कांग्रेस के नौ विधायक बगावत कर भाजपा खेमे के साथ खड़े हो गए थे। उन्होंने स्पीकर से विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग की थी। उसी रात को वे भाजपा विधायकों के साथ राज्यपाल से भी मिले। वहीं उनके साथ चार्टेर्ड विमान से दिल्ली को रवाना हुए। इस पर कांग्रेस की याचिका पर स्पीकर ने 27 मार्च को इन नौ बागी विधायकों की सदस्यता रद कर दी।

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