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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा नीट अध्यादेश पर मंजूरी के साथ ही राज्य बोर्डों के छात्रों को फिलहाल राहत मिल गई है। छात्रों को अब 24 जुलाई को होने वाले नीट परीक्षा में शामिल नहीं होना होगा। स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा मीडिया के कुछ हिस्सों में खबरें आ रहीं हैं कि नीट को टाल दिया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य बोर्डों के छात्रों को महज इस साल नीट परीक्षा से छूट हासिल है। अगले वर्ष से छात्रों को नीट परीक्षा में शामिल होना होगा।

सात राज्यों का NEET के तहत आने का फैसला

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि 1 मई से नीट लागू हो गया है। राज्यों ने अपनी समस्याएं अलग पाठ्यक्रम और क्षेत्रीय भाषा को लेकर बताई थी। जो राज्य चाहें NEET के दायरे में आ सकते हैं। नड्डा ने बताया कि सात राज्यों की परीक्षा नीट के तहत हो रही है। उन्होंने कहा कि यूपी नीट से बाहर है। जबकि बिहार NEET के तहत परीक्षा में शामिल होगा। सभी निजी संस्थान NEET के दायरे में होंगे। इस साल दिसबंर में पीजी की परीक्षा NEET के तहत ही होगी।

NEET से जुड़ी खास बातें

1.राष्ट्रपति ने NEET अध्यादेश को मंज़ूरी दी
2. इसी साल से NEET लागू
3. राज्यों को NEET से एक साल की छूट
4.राज्य चाहें तो NEET के तहत आ सकते हैं
5. इस साल से प्राइवेट कॉलेज NEET के दायरे में

अध्यादेश मंजूरी के खिलाफ चुनौती

संकल्प एनजीओ के प्रमुख डॉक्टर गुलशन ने कहा कि वो नीट अध्यादेश की मंजूरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे। डॉक्टर गुल्शन के वकील अमित कुमार ने कहा कि ‘इस तरह का अध्यादेश कानून के अंतर्गत नहीं आता। साथ ही ये संविधान और शक्ति के विभाजन के खिलाफ है। न्यायपालिका का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसे एक अध्यादेश के जरिए हटाया नहीं सकता है। कोर्ट का निर्णय केंद्र और राज्यों को सुनने के बाद लिया गया था। लिहाजा ये अध्यादेश कानूनी तौर पर सही नहीं है। इसके पीछे निहित स्वार्थ छिपा है। एक राष्ट्र और एक परीक्षा तो वर्तमान युग की की जरूरत है। राज्य बोर्ड व पाठ्यक्रम केवल एनसीईआरटी के अनुसार है। अध्यादेश लाने से पहले उनके पास काफी समय था। Read more http://www.jagran.com/

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