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दो वर्ष पहले तक पीएम मोदी से कुछ लोग संबंध बनाने तक से कतराते थे, यहां तक कि उनसे मिलने में हिचकते थे लेकिन दो वर्ष के भीतर उनकी शख्सियत ऐसी हो गयी है कि अब उनसे हर कोई संबंध बनाने के लिए आतुर है। यह बातें एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक ने उस समय कही हैं जब पीएम मोदी की अगले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात होने वाली है।

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल के एश्ले टेलिस ने मंगलवार को कहा, “प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की यह राष्ट्रपति (ओबामा) के साथ संभवत: सातवीं बैठक होगी। कोई भी देश जो अमेरिका का औपचारिक सहयोगी नहीं है उसके शासनाध्यक्ष के साथ बैठक के मामले में संभवत: यह मोदी और ओबामा दोनों के लिए एक रिकार्ड होगा।”

सात जून को ओबामा-मोदी की बैठक से पहले व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए टेलिस ने कहा, “यह उस व्यक्तिगत रिश्ते के बारे में बताता है, जो दोनों के बीच पिछले दो वर्षों के दौरान विकसित हुआ है और अमेरिका के साथ मोदी के इतिहास को देखते हुए यह आश्चर्यजनक है।” अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री आठ जून को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त सभा को संबोधित करेंगे।

टेलिस की बात पर सहमति व्यक्त करते हुए मिलन कार्नेगी के वैष्णव ने कहा कि मोदी में आये व्यक्तिगत बदलाव उल्लेखनीय हैं। वैष्णव ने कहा, “दो वर्ष पूर्व तक कानूनी मुद्दे को लेकर मोदी अमेरिकी धरती पर कदम भी नहीं रख सके थे और अब अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त सभा को संबोधित करने वाले हैं। यह कुछ ऐसा ही है कि, एक व्यक्ति जिसे कल तक कोई संपर्क नहीं बनाना चाहता था आज उससे संपर्क स्थापित करने को आतुर है।”

दो वर्षों के शासन के दौरान विदेश नीति को लेकर पूरे अंक देते हुए टेलिस ने कहा, “किसी खास विफलता की पहचान मुश्किल है, पाकिस्तान और नेपाल ही दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां उनकी नीति थोड़ी कमजोर पड़ती दिख रही है। मोदी के शासनकाल के दौरान भारत की विदेश नीति उल्लेखनीय रूप से सफल रही है।” टेलिस ने कहा कि मोदी केवल बातों में ही यकीन नहीं रखते बल्कि अपने कार्य करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह इच्छा रखते हैं कि संबंधों को दूर तक ले जाया जा सके।  Read more http://www.jagran.com/

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