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इस साल रोहतांग पास में बर्फ का रंग काला हो रहा है जबकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा बर्फ को पिघलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। 13,050 फुट ऊंचे पहाड़़ों के बर्फ पिछले वर्ष की तुलना में न केवल अधिक तेजी से पिघल रहे हैं बल्कि इनका रंग भी काला पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सामान्य तौर पर पूरे जून माह में रोहतांग बर्फ से ढका रहता है और जुलाई में पिघलना शुरू होता है। लेकिन इस वर्ष यह पूरी तरह से गायब है और कुछ ही बर्फ के धब्बों को देखा जा सकता है जो शायद अगले 10-15 दिनों में गायब हो जाए। जितने भी बर्फ बचे हैं सब काले हो रहे हैं जिससे पिघलने की गति में तेजी आ रही है।
एनजीटी ने रोहतांग क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ने के पीछे, पर्यटकों की अधिक संख्या, अनगिनत गाड़ियों के आने जाने और अनियमित पर्यटन क्रियाकलापों को कारण बताया। उसने आगे बताया कि हार्स राइडिंग, स्कीइंग, ढाबाओं, स्नो स्कूटरों व अन्य गाड़ियों की वजह से बर्फ का रंग काला हो गया है और क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है। ट्रिब्युनल ने क्षेत्र में कामर्शियल क्रियाकलापों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही हिमाचल सरकार से मास्टर प्लान तैयार करने और एक्टिवीटीज को नियमित करने को कहा था। इसने रोहतांग जाने वाले गाड़ियों की संख्या भी सीमित कर दी थी।

80 वर्षीय स्थानीय निवासी भाग चंद ठाकुर ने कहा, ‘मुझे लगता है ऐसा पहली बार हुआ है जब जून महीने में रोहतांग बर्फ के बिना है। अभी रोहतांग आने के लिए कुछ ही गाड़ियों को अनुमति मिली है व सभी टूरिज्म एक्टीविटीज प्रतिबंधित है। ढाबाओं को हटा दिया गया है। तब भी काले हो रहे ये बर्फ तेजी से पिघल रहे हैं।‘

पिछले साल रोहतांग में जुलाई अंत तक बर्फ मौजूद थे।  Read more http://www.jagran.com/

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