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सामाजिक कुरीतियों को तोड़ने में लोगों को लंबा समय लगता है। जिले की जनादाई को ऐसी कुरीति से लड़ने में सात साल लग गए। उसकी पहल की महिलाएं ही नहीं प्रशासन भी प्रशंसा कर रहा है। राज्य महिला आयोग ने उसे बहादुर लड़की बताते रायपुर बुलाया है।

जिले की आदिवासी युवतियों में पहले मासिक धर्म के दौरान जंगल में रहने की कुप्रथा थी। इसे तोड़ने पूरनतरई की जनादाई ने जागरूकता मुहिम छेड़ा और सफल हो गई। अब गांव की युवतियों को मासिक धर्म होने पर परिवार के साथ ही घर पर रहने की छूट है जबकि दशक भर पहले उन्हें ऐसी स्थिति में जंगल भेज दिया जाता था जहां बनी झोपड़ी में वह रात गुजारती थी।

तब वहां जंगली जीव-जंतुओं के हमले का भी भय बना रहता था। इसे दूर करने के लिए जनादाई ने वर्ष 2009-10 से संघर्ष शुरू किया। जनादाई के अनुसार उसके इस संघर्ष का ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन जब महिलाएं उसके साथ जुड़ीं तो धीरे-धीरे हौसला बढ़ा और अब क्षेत्र के लोग जागरूक होने के साथ ही इस कुप्रथा का विरोध करने लगे हैं।

जनादाई के अनुसार उसके अभियान में तुड़पारास की भीमे, भोगाम की रीना मंडावी, मिड़कुलनार की प्रमिला नायक ने समर्थन करते अपने गांव में कुप्रथा उन्मूलन अभियान शुरु किया था। जनादाई और उसके साथी आज भी सामाजिक बैठक और कार्यक्रमों में इस कुप्रथा के संबंध में जानकारी देते हैं।

जारी है अभियान

जनादाई अपने अभियान को अब भी जारी रखे है। वह बताती है कि सामाजिक कार्यों के दौरान पूरे जिले में घूमकर लोगों से कुप्रथा के संबंध में जानकारी लेती रहती हैं ताकि रूढवादी लोग सामाजिक रीतियों का हवाला देकर इसे फिर शुरू न कर दें। वे ग्रामीणों को बताती हैं कि शाम को जंगल में रहने से लड़की के सुरक्षा को खतरा हो सकता है। वहीं उसके मन-मस्तिष्क में भी कई कुविचार आने की आशंका बनी रहती है।

आयोग ने बुलाया रायपुर

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पांडेय और सदस्य खिलेश्वरी किरण ने मंगलवार को पूरनतरई जाकर जनादाई से मुलाकात की। उसके अनुभव और संघर्ष की कहानी सुनने के बाद उसे बहादुर बेटी बताते बस्तर के उज्जवल भविष्य का चेहरा बताया। आयोग की पदाधिकारियों ने जनादाई नाग को रायपुर भी आमंत्रित किया है।  Read more http://www.jagran.com

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