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सियोल में एनएसजी की शीर्षस्तर की बैठक में भारत चीन को छोड़ करीब-करीब सभी देशों को मनाने में कामयाब रहा। लेकिन, चीन की ना के बाद एनएसजी में भारत की दावेदारी पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, भारत ने अमेरिका और अन्य देशों का समर्थन हासिल कर लिया था जिसके बाद ऐसा माना जा रहा था कि चीन अगर अपनी सहमति दे देगा तो भारत का प्रवेश एनएसजी में पक्का है।

उधर, सूत्रों के मुताबिक, ब्राजील ने भारत के परमाणु रिकॉर्ड को बेहतर बताते हुए अपना समर्थन देने की बात कही लेकिन स्वीट्जरलैंड ने भारत की दावेदारी का पुरजोर विरोध किया है। हालांकि, पीएम की यात्रा के दौरान स्वीट्जरलैंड ने एनएसजी पर समर्थन की बात कही थी।

चीन ने आज बिल्कुल साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर एनएसजी में सदस्यता की भारत की दावेदारी का वह समर्थन नहीं करने जा रहा है। उसने भारत की तुलना नॉर्थ कोरिया से करते हुए कहा कि भारत को एनएसजी में सदस्यता का समर्थन करना एक तरह से नॉर्थ कोरिया की परमाणु की स्थिति के लिए उसे माफ करना है।

शुक्रवार की सुबह एक बयान जारी करते हुए चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने बताया है कि नियम उन देशों को एनएसजी सदस्य बनने की इजाजत नहीं देता है जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं। इसलिए किसी भी देश को इस मामले में छूट नहीं दी जा सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, बयान से साफ जाहिर होता है कि कैसे ईरान और नॉर्थ कोरिया के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम का हवाला देकर भारत का एनएसजी में प्रवेश रोक रहा है जबकि पाकिस्तान को परमाणु सामग्री बेचने पर चीन पूरी तरह से चुप है।

Source:  NSG पर चीन की कुटिल चाल, नॉर्थ कोरिया- ईरान से की भारत की तुलना

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