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बिहार बोर्ड की इंटर आर्ट्स टॉपर रही रूबी राय के मामले में पटना पुलिस जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के उल्लंघन मामले में फंस सकती है। नाबालिग होने के बावजूद रूबी के साथ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमों के उल्लंघन के मामले में सामाजिक संगठन ‘प्रयास’ द्वारा दो दिनों में पटना हाईकोर्ट में रिट दायर की जाएगी। मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में सख्ती दिखाई है।

इस मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को मानवाधिकार आयोग की टीम ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कार्यालय पहुंचकर रूबी की उम्र और उसकी गिरफ्तारी से जुड़े मुद्दों पर सचिव से पूछताछ की। आयोग ने संकेत दिए कि वह पटना पुलिस से इस मामले में पूछताछ करेगी क्योंकि रूबी को गिरफ्तार करने में किशोर न्याय बोर्ड के मानदंडों का पालन नहीं हुआ।

सादी वर्दी में पकडऩा था रूबी को

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पूर्व सदस्य डीके मिश्रा एवं सामाजिक संगठन ‘प्रयास’ के स्टेट प्रोग्राम निदेशक सुरेश कुमार ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने कानून का उल्लंघन किया। कहा कि नियम के अनुसार रूबी को पटना पुलिस को सादी वर्दी में पकडऩा चाहिए था। उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष उपस्थित करना चाहिए था। लेकिन, उसे कोर्ट में प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया।

बाल अधिकार का उल्लंघन

उन्होंने कहा कि यह बाल अधिकार एवं जेजे एक्ट के नियमों का उल्लघंन है। जघन्य अपराध में भी पुलिस किसी किशोर को जेल नहीं भेज सकती है। रूबी का मामला तो जघन्य अपराध में आता ही नहीं है। ऐसे में न्यायालय एवं जेल भेजना गलत है।

पहचान नहीं करनी थी उजागर

कहा गया कि पुलिस को जेजे एक्ट की धारा 74 के तहत किशोरी की पहचान उजागर नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन इसका ख्याल नहीं रखा गया।

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