NIA का दावा, ISIS के संपर्क में थे हैदराबाद में गिरफ्तार संदिग्ध

Tags

, , , , , ,

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को दावा किया कि यहां गिरफ्तार किए गए पांच व्यक्तियों को पश्चिम एशिया स्थित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से भारत में आतंकी गतिविधियों की सजिश रचने और उन्हें अंजाम देने के लिए दिशानिर्देश मिल रहे थे।

आईएस के साथ संलिप्तता वाले एक गुट से जुड़े होने के संदेह और बम हमले की साजिश रचने के आरोप में एनआईए द्वारा शहर से गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों, मोहम्मद इब्राहिम यजदानी उर्फ इब्बू, हबीब मोहम्मद उर्फ सर, मोहम्मद इलयास यजदानी, अब्दुल्ला बिन अहमद अल अमूदी और मुजफ्फर हुसैन रिजवान को को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

एनआईए के अनुसार प्रारंभिक जांच के दौरान पाया गया कि गिरोह आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के लिए आईईडी तैयार कर रहा था और इसके लिए गिरोह को एक ऑनलाइन हैंडलर से दिशा निर्देश दिए जा रहे थे। ऐसा संदेह है कि हैंडलर इराक या सीरिया में था। एजेंसी ने कहा कि आगे जांच जारी है।

इससे पहले एनआईए ने पुख्ता जानकारी के आधार पर पहले एक मामला दर्ज किया था कि हैदराबाद के कुछ युवक और उनके साथी देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों, संवेदनशील सरकारी इमारतों समेत सार्वजनिक स्थानों पर आतंकी हमले करने के लिए हथियार और विस्फोटक सामग्री एकत्र करके भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहे हैं।

Read more http://www.jagran.com/

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का दावा, रघुराम राजन बनना चाहते थे RBI गवर्नर

Tags

, , , , ,

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के मुद्दे पर सियासी खींचतान के बीच पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि राजन आरबीआई के गवर्नर बनना चाहते थे। राजन को गवर्नर बनाकर उन्होंने उनका सम्मान किया। मनमोहन सिंह से एक साक्षात्कार में जब ये पूछा गया कि क्या राजन को पिछले दरवाजे से गवर्नर बनाया गया। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गवर्नर की रेस में कई लोग थे। सरकार योग्य शख्स को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना चाहती थी। रघुराम राजन की योग्यता नि:संदेह इस पद के लायक थी। जब मौका आया तो उन्हें आरबीआई गवर्नर की जिम्मेदारी दी गयी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मनमोहन सिंह ने पहले राजन को पीएम का अवैतनिक सलाहकार बनाया। इसके बाद जब मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद खाली हुआ तो राजन को ये जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर रहते हुए राजन ने ये इच्छा जाहिर किया कि जब गवर्नर का पद खाली हो तो उनकी अर्जी पर विचार किया जाए। इस मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी सहमति जताई और राजन को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया। ऐसा करके उन्होंने एक योग्य शख्स का सम्मान किया।

वित्त मंत्री-आरबीआई गवर्नर में होते रहे हैं मतभेद

मनमोहन सिंह ने कहा कि वित्त मंत्रियों और आरबीआई गवर्नर के बीच अनेक मुद्दों पर मतभेद होते रहे हैं। ये कोई नई बात नहीं है। लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान रिश्ता बहुत सहज था। उनके समय रहे गवर्नर रंगराजन एक सीनियर टेक्नोक्रेट थे। जब की किसी मुद्दे को लेकर असहमति हुई तो दोनों लोगों ने मिलकर उस समस्या को सुलझाने की कोशिश की। लेकिन इस सरकार में आए दिन सरकार और आरबीआई के बीच टकराव की खबरें न्यूज हेडलाइंस बन जाती हैं।

राजन पर स्वामी साधते रहे हैं निशाना

रघुराम राजन के कार्यकाल की भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी आलोचना करते रहे हैं। उनके जरिए स्वामी ने वित्त मंत्री जेटली को निशाने पर ले लिया था। हालांकि पीएम मोदी ने एक साक्षात्कार में साफ कर दिया कि महज पब्लिसिटी के लिए बयानबाजी से बचना चाहिए। इसके अलावा पीएम ने ये भी कहा कि कोई भी शख्स व्यवस्था से ऊपर नहीं है। संस्थाओं का सम्मान करने की जिम्मेदारी हर एक शख्स की है।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को है दुख

मनमोहन सिंह ने कहा कि 25 साल पहले 1991 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी थीं। आर्थिक सुधारों के जरिए भारत को मुश्किलों से निकालने की कोशिश हुई। देश आर्थिक तौर पर सबल हुआ। लेकिन आज 25 साल बाद हालात फिर वही है, जो 1991 में थी। मनमोहन सिंह ने कहा कि तत्कालीन पीएम नरसिम्हाराव के सामने जब देश की आर्थिक बदहाली का जिक्र किया गया तो उन्होंने तत्काल कदम उठाने को कहा। उन्होंने जब आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया शुरू की तो पार्टी के अंदर ही जबरदस्त विरोध था। लेकिन नाथू राम मिर्धा, मणिशंकर अय्यर ने उनके प्रयासों की सराहना की।

1991 में सोना गिरवी रखना जरुरत थी

मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले सोने की एक खेप को गिरवी रखा जा चुका था। कांग्रेस ने सिर्फ प्रक्रियाओं का पालन करते हुए दूसरी खेप को बिना किसी शोर-शराबे के गिरवी रखा। ये बात सच है कि विपक्ष ने कांग्रेस के इस कदम की आलोचना की। लेकिन हकीकत ये थी कि अगर ऐसा कदम नहीं उठाया गया होता तो देश मुश्किलों में फंस जाता और उससे निकलने का रास्ता बेहद ही कठिन था।

Read more http://www.jagran.com/

कपिल शर्मा ने अंग्रेजी झाड़ने वाले की ले ली जमकर क्‍लास, देखें वीडियो

Tags

, , , , , , , , ,

सोशल मीडिया पर कपिल शर्मा का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया है। इसमें वो अंग्रेजी झाड़ने वाले एक युवक की क्लास लेते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो का टाइटल है ‘अंग्रेजपंती को अंगूठा’ और इसमें उन लोगों को सबक सिखाया गया है, जो अंग्रेजी जानने के अहंकार में अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी की बेइज्जती करने से बाज नहीं आते।

इस वीडियो में कपिल शर्मा ने कहा है कि हुनर की कोई भाषा नहीं होती। उनके मुताबिक, ‘जब हुनर चमकता है तो अंग्रेजीपंती फीकी पड़ जाती है।’ इस वीडियो के जरिए कपिल शर्मा ने लोगों को गर्व से अपनी मातृभाषा बोलने और उसे सम्मान देने के लिए प्रेरित किया है।

Read more http://www.jagran.com/

रालोसपा में तूफान, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए सांसद अरुण कुमार, सभी कमेटियां भंग

Tags

, , , , , , , , ,

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी में शुरू हुआ विवाद अब अलग रूप लेता दिख रहा है। पार्टी में पिछले कुछ दिनों से शुरू हुई खींचतान के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आज प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार को उनके पद से हटा दिया है। साथ ही प्रदेश स्तरीय सभी कमेटियां भंग कर दी गई हैं।

उधर इस मामले की जानकारी मिलने पर सांसद अरुण कुमार ने कहा कि रालोसपा अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद वे खुद को हल्का महसूस कर रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा चाटुकारों से घिरे हुए हैं और उनको अपनी हकीकत का ही पता नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक अरुण कुमार को हटाए जाने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इस मसले को लेकर रालोसपा पूरी तरह दो धड़ों में बंटती दिख रही है। बताया गया है कि कार्रवाई के लिए होने वाली बैठक में पार्टी के वरीय नेताओं को नहीं बुलाया गया। अपने निकटवर्ती समर्थकों के साथ बैठक कर उपेंद्र कुशवाहा ने अरुण कुमार को पद से हटाने की घोषणा की। सांसद अरुण कुमार जो कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे, पिछले दिनों प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उपेंद्र कुशवाहा पर हवाला कारोबारियों के साथ होने का आरोप लगाया था।

इस बारे में पूछे जाने पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव फैसल इमाम मल्लिक ने बताया कि अरुण कुमार को हटाने में कोई राजनीति नहीं की गई है। विधानसभा चुनाव के बाद से ही संगठन में फेरबदल प्रस्तावित था। लेकिन पंचायत चुनाव के कारण फैसले में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इस कदम का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।

जानकारों का कहना है कि ललन पासवान और शिवराज सिंह जैसे पार्टी नेताओं की गैरमौजूदगी में अरुण कुमार पर कार्रवाई संबंधी प्रस्ताव की मंजूरी को लेकर भी पार्टी के बड़े हिस्से में असंतोष के स्वर उभर सकते हैं। बताया गया है कि तीन सांसदों वाली पार्टी में एक सांसद अरुण कुमार खुद भी हैं जिन्हें कुशवाहा ने पद से हटाया है। इसे लेकर पार्टी के भीतर विवाद गहराने की उम्मीद है क्योंकि अरुण कुमार के समर्थकों की भी पार्टी में अच्छी संख्या है।

पार्टी के लोकसभा में तीन सांसद हैं। इसमें अरुण कुमार जहानाबाद के सांसद हैं। पार्टी 2014 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ तीन सीटों से लड़ी थी और तीनों पर इसको जीत मिली थी।विधानसभा में पार्टी के दो सदस्य हैं। इस विवाद के बाद सबकी नजरें अब जहानाबाद के पार्टी सांसद और हटाए गए प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार के अगले कदम पर टिकी हैं। बताया गया है कि वे भी अपने समर्थकों संग बैठक कर अपने अगले कदम का एलान कर सकते हैं।

उपेंद्र कुशवाहा और अरूण कुमार में चल रहा था विवाद

रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और जहानाबाद सांसद अरूण कुमार में विवाद चल रहा था। विवाद के कारण रालोसपा में दो गुट बन गया था। जिसको लेकर कई बार पार्टी के नेता एक साथ नहीं आ पाए। अरूण पर आरोप यह भी है कि उनका एक समर्थक ने पीएम को पत्र लिखा था जिसपर उपेंद्र कुशवाहा के हवाला कारोबारियों से संबंध का आरोप लगाया था।

Read more http://www.jagran.com/

मायावती को एक और झटका, महासचिव आरके चौधरी का BSP से इस्तीफा

Tags

, , , , , , , , ,

बीएसपी चीफ मायवती को एक और झटका गुरुवार को लगा जब पार्टी के महासचिव आरके चौधरी ने बीएसपी से इस्तीफा दे दिया। आरके चौधरी की गिनती बीएसपी में दिग्गज और राष्ट्रीय नेताओं में की जाती है। यूपी में 2017 में होनें वाले चुनाव से पहले बीएसपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है। वहीं आरके चौधरी 2007-12 तक बीएसपी सरकार में मंत्री भी रहें। चौधरी की पहचान पार्टी में दलित नेता के रुप में रही है।

बसपा छोड़ने के बाद आरके चौधरी ने कहा कि मायावती ने पार्टी को अपनी जागीर बना लिया है। प्रापर्टी डीलर व भू-माफिया बसपा में बढ़ते जा रहे हैं और मिशनरी कार्यकर्ता बाहर। उन्होंने कहा कि बसपा छोड़ने वालों का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। अगले कदम के बारे में चौधरी ने कहा कि वह 11 जुलाई को अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ जाने के सवाल पर चौधरी ने कहा कि अभी वह किसी के साथ नहीं जा रहे हैं।

चौधरी ने सीधे तौर पर मायावती पर धन उगाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वो पार्टी में टिकट बटवारें को लेकर जमकर रुपए की लूट खसौट करती है। वहीं बीएसपी अब रीयल स्टेट कंपनी बनकर रह गयी है। बागी नेता आरके चौधरी ने कहा कि बीएसपी अब वो पार्टी नही रही जो पहले काशी राम के जमानें पर चलती थी।
बता दें, कि 22 जून को प्रेस कांफ्रेंस में इस्तीफे की घोषणा करते हुए बीएसपी विधान मंडल दल के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर संगीन आरोप लगते हुए कहा कि उन्होंने अम्बेडकर के सपनों को बेचा है। मौर्या ने मायावती पर पार्टी में टिकट बेचने का भी आरोप लगाया था।

Read more http://www.jagran.com/

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पहल पर 6 साल बाद बांग्लादेश से वतन लौटा सोनू

Tags

, , , , , , , , ,

दिल्ली से लापता हुआ सोनू 6 साल बाद अपने वतन लौट आया है। साल 2010 में जब सोनू 6 साल का था तब उसे दिल्ली के सीलमपुर इलाके से किडनैप किया गया था। सोनू के पिता ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा किया है। भारत लौटने पर सोनू ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की। इस दौरान उसकी मां भी मौजूद थी।

सोनू को बांग्लादेश के जसोर में ट्रेस किया गया था। बुधवार को ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर ये जानकारी दी थी कि सोनू का डीएनए उसकी मां से मैच कर गया है।

सफल हुआ विदेश मंत्रालय का प्रसाय
ये मामला विदेश मंत्रालय के संज्ञान में आने के बाद सुषमा स्वराज के आदेश पर इंडियन हाई कमीशन की एक टीम को जसोर भेजा गया था। सोनू वहां एक चाइल्ड केयर होम में रह रहा था। जिसके बाद सुषमा ने ट्वीट कर लिखा था, हमारी कोशिश रंग लाई। बांग्लादेश ने सोनू को इंडियन अथॉरिटी को सौंप दिया है।

फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ से मिलती है सोनू की कहनी
सोनू को देश लौटने की कहानी सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ की तर्ज पर ही सामने आयी है। इस कहानी में हीरो बने हैं बांग्लादेश के जमाल इब्नमूसा। दरअसल बांग्लादेश में रहने वाले जमाल इब्नमूसा के पास एक 11 साल का बच्चा रोता बिलखता पहुंचा था। बच्चे ने बताया कि उसे भारत से अपहरण करके लाया गया है और उसका नाम सोनू है। यहां उससे दिनभर काम लिया जाता है और उसे मारा पीटा जाता है।

जमाल का इरादा पक्का था
जमाल ने बच्चे को उसके परिजनों से मिलाने का ठान लिया। बच्चे की बातचीत से मिली जानकारी के आधार पर उसने बच्चे के परिजनों को ढूंढ निकाला। सोनू उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके स्थित झुग्गी का रहने वाले हैं। उसके पिता महमूद मिस्त्री का काम करते हैं। सोनू के परिवार से मिलकर जमाल ने सारी कहानी उन्हें बताई, जिसके बाद परिजन जमाल के साथ सीलमपुर पुलिस स्टेशन पहुंचे। जहां से गुहार लगाने के बाद जब मामला विदेशमंत्री सुषमा सवराज की संज्ञान में आया तो उन्होंने संबंधित अधिकारी को मामले पर कारवाई का आदेश दिया, जिसके बाद बांग्लादेश सरकार से संपर्क कर सोनू और उसकी मां का डीएनए कराया गया।

कैसे किडनैप हुआ था सोनू?
मुमताज के मुताबिक, 23 मई 2010 को सोनू घर के बाहर ही खेल रहा था। इसके बाद वो लापता हो गया। सीमापुरी थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। 3 साल चली खोज के बाद भी सोनू का पता नहीं लगाया जा सका। मुमताज ने बताया कि सोनू के लापता होने के बाद एक महिला ने फोन किया। बच्चे के बदले फिरौती की मांग की। मुमताज के मुताबिक, सोनू का किडनैप रहीसा बेगम और उसकी बहन अकलीमा बेगम ने ही किया था।

Read more http://www.jagran.com/

संभावित फेरबदल के बीच कैबिनेट की बैठक आज, जानें- किसको मिल सकता है मौका

Tags

, , , ,

केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4 बजे 7 रेसकोर्स रोड पर मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। माना जा रहा है कि कैबिनेट में फेरबदल से पहले पीएम मोदी सभी मंत्रियों के काम का लेखा-जोखा देखना चाहते हैं। पिछले कुछ दिनों से कैबिनेट में फेरबदल की खबरें आ रहीं है।

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रियों की परफॉर्मेंस की समीक्षा की जाएगी। मंत्रियों से कहा गया है कि वे पिछले दो साल में अपने-अपने मंत्रालय में किए गए काम-काम पर प्रेजेंटेशन बनाकर लाएं। यही नहीं, 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है, लिहाजा मीटिंग में मानसून सत्र की रूपरेखा भी तय होगी।

इन चेहरों को मिल सकता है मौका

उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पीएम मोदी कैबिनेट में जाति और राज्यों का संतुलन बनाना चाहते हैं। प्रमुख मंत्रालयों में फेरबदल की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री निहाल चंद को हटा कर अर्जुन मेघवाल को पद सौंपा जा सकता है। दोनों सांसद राजस्थान से आते हैं। साथ ही कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री संजीव बालियान को स्वतंत्र प्रभार दिया जा सकता है। इसके अलावा अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल को सरकार में पदभार दिया जा सकता है। पटेल की पार्टी 2014 के संसदीय चुनावों में भाजपा के लिए काफी अहम साबित हुई थी। वहीं पंजाब से नवजोत सिंह सिद्धू, असम से रामेश्वर तेली और उत्तराखंड से भगत सिंह कोश्यारी या अजय टम्टा को अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

अगले साल राज्य में होने वाले चुनावों को देखते हुए भाजपा नॉन-यादव ओबीसी वोटबैंक को मजबूत करने की फिराक में है। सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण राज्य मंत्री विजय सांपला को हाल ही में पंजाब भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, इसलिए उन्हें भी पद से मुक्त किया जा सकता है।

Read more http://www.jagran.com/

अब मुश्किल में चीन, NSG पर भारत के खिलाफ दांव पड़ सकता है उल्टा

Tags

, , , , , , ,

कहते हैं कि राजनीति और कूटनीति में समय का बहुत ज्यादा महत्व होता है। जो फैसला आप के पक्ष में न हो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उम्मीद छोड़ दें। 24 जून को सियोल बैठक में एनएसजी में भारत की दावेदारी पर चीन की चाल कामयाब हुई। लेकिन चीन अब मुश्किलों में है। उसकी मुश्किल के पीछे कई वजह हैं। जिसे क्रमवार जानने को कोशिश करते हैं।

सियोल में चीन के मुख्य वार्ताकार वैन कून ने चीनी शासन को भरोसा दिलाया था कि 48 सदस्यों वाले एनएसजी के एक तिहाई सदस्य चीन का समर्थन करेंगे। लेकिन वैन कून की रणनीति और कूटनीति औंधे मुंह गिर गई। चीन समेत महज चार देशों ने भारत की दावेदारी का विरोध किया। जानकारों का कहना है कि सियोल के परिणाम से भारत को जितनी निराशा हुई हो, उससे कम धक्का चीन को भी नहीं लगा। चीन को यकीन था कि कम से कम 15 देश उसका समर्थन करेंगे।

चीन को ये सब इतना नागवार लगा कि उसने मुख्य वार्ताकार वैन कून की सार्वजनिक तौर फटकार लगा डाली। चीन प्रशासन वैन कून की रणनीति पर सवाल उठाता रहा।

साउथ चीन सागर पर चीन की मुश्किल

साउथ चीन सागर के मुद्दे पर चीनी रणनीतिकार मुश्किल में हैं। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हेग आरबिट्रेशन से कुछ दिनों में फैसला आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये फैसला चीन के खिलाफ जा सकता है। आरबिट्रेशन कोर्ट फिलीपींस के समर्थन में फैसला सुना सकता है। कोर्ट के फैसले का मतलब ये होगा कि फिलीपींस की हड़पी गयी जमीन को चीन को वापस करना होगा। इस फैसले का इससे भी बड़ा असर ये होगा कि चीन युनाइटेड कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सी से बाहर हो सकता है जिसका वो सदस्य है।

भारत के पास है मौका

चीन को इस बात का डर है कि आरबिट्रेशन कोर्ट के फैसले के बाद भारत वही दांव खेल सकता है। जिसे चीन ने सियोल मीटिंग के दौरान किया था। जानकारों का कहना है कि हेग फैसले का हवाला देकर भारत, चीन को अकंलास से बाहर करने का दबाव बना सकता है। भारत को इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने में मुश्किल भी नहीं आएगी। चीन का कहना है कि उसे 60 देशों का समर्थन हासिल है जो ये मानते हैं कि हेग आरबिट्रेशन अवैध है।

पश्चिमी देशों का भी मानना है कि साउश चीन सी के मुद्दे पर चीन को अलग-थलग होने का डर सता रहा है। चीन हेग आरबिट्रेशन के फैसले का इंतजार कर रहा है। हालांकि चीनी रणनीतिकार उनके हित में आड़े आने वाले कानूनों की वैधता पर ही सवाल उठा देते हैं। इसके उलट अगर अवैध कानून उसके हित को साधने में मदद देते हैं, तो चीन उन कानूनों को वैध बताने में गुरेज भी नहीं करता है।

Read more  http://www.jagran.com/

नरसिम्हा राव की हिंदूवादी सोच की वजह से गिरी बाबरी मस्जिद : उप राष्ट्रपति

Tags

, , , , , , , ,

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को राजनीतिक दल अलग-अलग ढंग से व्याख्या करते हैं। कुछ राजनीतिक दल भारत पर लगे दाग को मिटाने की बात मानते हैं। वहीं कुछ राजनीतिक दल उस दिन को काला दिन के तौर पर याद करते हैं। बाबरी मस्जिद गिराए जाने का गुनहगार कौन है। इस मामले की सुनवाई अदालत में लंबित है।

लेकिन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक सनसनीखेज बयान में कहा कि कांग्रेस के नेता और तत्कालीन पीएम नरसिम्हाराव की हिंदुत्ववादी सोच की वजह से बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी। विनय सीतापति द्वारा लिखी गई किताब हॉफ लॉयन के लोकार्पण के मौके पर हामिद अंसारी ने कहा कि अगर ये देश राव के अच्छे कामों का फायदा उठा रहा है। तो वहीं उनके गलत कामों का खामियाजा भी देश भुगत रहा है।

किताब के लेखक का कहना है कि नरसिम्हाराव ने कानून के हिसाब से काम किया था। बाबरी मस्जिद गिराए जाने में उनकी भूमिका नहीं थी। राव पर ये आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कुछ किया ही नहीं था। किताब के लेखक का कहना है कि कांग्रेस कभी भी राव को लेकर दयालू नहीं रही। यही नहीं राव ने मुस्लिम वोटों को रिझाने के लिए कुछ ऐसे काम किए। जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद कांग्रेस ने राव को हासिए पर डालने का फैसला कर लिया था।

किताब के उद्घाटन के मौके पर मौजूद कांग्रेस के कद्दावर नेता मणिशंकर अय्यर मुस्लिमों को रिझाने वाले बयान पर आपत्ति दर्ज की। कांग्रेस ने राव को खतरे से आगाह किया था। हालांकि उन्होंने ढील दी।

उपराष्ट्रपति हामिद ने किताब में लिखे गए कई प्रसंगों का हवाला देते हुए कहा कि 1992 में कांग्रेस सरकार बहुमत से 10 सीट दूर थी। विपक्ष पूरी तरह बिखरा था। सामान्य तौर पर ये धारणा थी कि सरकार कमजोर है। लिहाजा राव सभी दलों के साथ संसदीय कार्रवाई को सही ढंग से चलाए जाने पर खासा ध्यान दे रहे थे। इस दौरान राव ने कई व्यक्तिगत संबंध विकसित किए थे। सरकार किसी भी कीमत पर अपनी सरकार को बचाना चाहती थी। इसके लिए कई अनैतिक प्रयास किये गए।

Read more http://www.jagran.com/

भाजपा ने स्वामी प्रसाद के लिए खोले दरवाजे, एक जुलाई को दिखाएंगे ताकत

Tags

, , , , , , ,

बसपा से बागी हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भले ही अपने पत्ते नहीं खोले हों लेकिन उनके प्रति भाजपा का रुख सकारात्मक है। उधर स्वामी प्रसाद आगामी एक जुलाई को प्रस्तावित कार्यकर्ता सम्मेलन सफल बनाने की कोशिश में जीजान से जुटे हैं क्योंकि सम्मेलन से ही उनका सियासी कद तय होगा।

बसपा के बगावत के बाद स्वामी प्रसाद को अपेक्षित समर्थन न मिलने से समर्थकों के बेचैनी है और एक राय नहीं हो पा रहे है। एक खेमा अलग दल बनाने के लिए माहौल बना रहा है तो भाजपा में शामिल होने की लाबिंग करने वाले भी कम नहीं। वहीं, कुछ समर्थक कांग्रेस के नजदीकी बढ़ाने के तर्क गिना रहे हैं। कांग्रेस से मेल करने की पैरोकारी करने वालों का कहना है कि भाजपा में उन्हें पर्याप्त सम्मान नहीं मिल सकेगा और समर्थकों को भी टिकट दिलाने का संशय रहेगा।

इस ऊहापोह की स्थिति में उलझे स्वामी प्रसाद एक जुलाई को अपेक्षित भीड़ न जुटा सके तो किरकिरी होगी। इसलिए तोलमोल करने से पहले स्वामी समर्थक पूरी ताकत से सम्मेलन को सफल बनाने में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि भाजपा व कांग्रेस नेता भी स्वामी प्रसाद के सम्मेलन पर नजर लगाए है। सम्मेलन कामयाब रहेगा तब ही स्वामी को साथ में लेने का फायदा होगा।

उधर, स्वामी को पार्टी में शामिल कराने के संदर्भ में जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह आना तो चाहें। शाह ने कहा कि स्वच्छ और संघर्षशील छवि के लोगों को भाजपा जरूर अवसर देगी। जागरण फोरम में आए अमित शाह से जब यह बात उठी कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बगावत की मायावती को भनक नहीं लगी वरना उन्हें बाहर कर देती तो अमित शाह का कहना था कि मायावती बहुत दिन से स्वामी का तेवर देख रही थी लेकिन वह स्वामी प्रसाद को बाहर निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।

Read more http://www.jagran.com/