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आज रवींद्र जडेजा भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं। वैसे उनके करियर के दौरान एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन परिजनों और दोस्तों की सलाह के बाद उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा, अन्यथा हमें ‘सर जडेजा’ को मैदान में देखने का मौका नहीं मिल पाता।

जडेजा गरीब परिवार से आते हैं और उनके पिता अनिरूद्ध सिंह जडेजा प्राइवेट सिक्योरिटी एंजेसी में वॉचमैन थे। रवींद्र ने क्रिकेट में पहचान बनाना शुरू ही की थी कि 2005 में उनकी मां लता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई, इसके चलते रवींद्र क्रिकेट छोड़ने का विचार कर रहे थे। लेकिन परिजनों और दोस्तों के समझाने के बाद उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और आगे चलकर भारतीय टीम के लिए उन्हें खेलने का मौका मिला।

जडेजा ने 19 अक्टूबर 2006 को दुलीप ट्रॉफी में पश्चिम क्षेत्र की तरफ से दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ प्रथम श्रेणी पदार्पण किया। वे 2006 और 2008 में भारत अंडर-19 टीम की तरफ से विश्व कप खेले और उनके ऑलराउंड प्रदर्शन की भारत को 2008 में अंडर-19 विश्व कप दिलाने में अहम भूमिका रही।

आइपीएल के पहले संस्करण में छा गए : जडेजा के करियर को आईपीएल के पहले संस्करण में 2008 में नया मोड़ मिला। वे राजस्थान रॉयल्स टीम में शामिल रहे और उन्होंने अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान शेन वॉर्न ने उन्हें ‘रॉक स्टार’ नाम दिया। उन्होंने 14 मैचों में 131.06 के स्ट्राइक रेट से 135 रन बनाए। फाइनल में उन्होंने यादगार प्रदर्शन किया। अगले संस्करण में उन्होंने 6 विकेट लिए और 295 रन बनाए।

अंतरराष्ट्रीय पदार्पण : जडेजा को उनके बेहतर खेल का लाभ मिला और उन्होंने 8 फरवरी 2009 को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय वन-डे में पदार्पण किया। जडेजा इसके बाद प्रदर्शन में निरंतरता के अभाव में टीम इंडिया में जगह पक्की नहीं कर पाए।

आइपीएल में प्रतिबंध : जडेजा के करियर को 2010 में उस वक्त झटका लगा जब उन्हें नियम के विरूद्ध दूसरी फ्रेंचाइजी से संपर्क करने के कारण आइपीएल से एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।

2012 में हुए सीएसके के : जडेजा के करियर में निर्णायक मोड़ 2012 में आया जब चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसक) ने उन्हें खरीदा। डेक्कन चार्जर्स और सीएसके ने उनके लिए जमकर बोली लगाई, लेकिन वे करीब 10 करोड़ में सीएसके के हुए।

नागपुर में टेस्ट पदार्पण : उन्होंने इसी वर्ष 13 दिसंबर को नागपुर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट पदार्पण किया। वैसे उन्होंने अपनी पहचान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले वर्ष बनाई। इस सीरीज में जडेजा ने 4 टेस्ट मैचों में 17.45 की औसत से 24 विकेट झटके। इसी के बाद से धौनी ने उन्हें ‘सर जडेजा’ कहना शुरू किया।

एक साल से ज्यादा समय तक टीम से बाहर : बांग्लादेश के खिलाफ जून 2015 में वन-डे सीरीज के बाद खराब प्रदर्शन के चलते जडेजा करीब 14 महीनों तक टीम इंडिया से बाहर रहे। इस दौरान उन्होंने एक तरह से क्रिकेट से दूरी बना ली थी। इस ब्रेक के दौरान उनका आत्मविश्वास जागा और उन्होंने रणजी ट्रॉफी में धमाकेदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया में वापसी की।

धमाकेदार वापसी : जडेजा ने दिसंबर 2015 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर भारत को द. अफ्रीका के खिलाफ 3-0 से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 4 मैचों में 23 विकेट झटके। वे आइपीएल की नई फ्रेंचाइजी गुजरात लॉयंस ने उन्हें 9.5 करोड़ में खरीदा और अब वे सुरेश रैना की अगुआई में अपनी घरेलू टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 27 वर्षीय जडेजा अभी तक अंतरराष्ट्रीय करियर में 16 टेस्ट मैचों में 473 रन बनाने के अलावा 68 विकेट ले चुके हैं। उन्होंने इसके अलावा 126 वन-डे और 37 टी-20 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। Read more http://www.jagran.com/

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